धरती और मेरा आसमान - अंजना भट्ट

धरती और मेरा आसमान मैं? मैं हूँ एक प्यारी सी धरती कभी परिपूर्णता से तृप्त और कभी प्यासी आकाँक्षाओं में तपती. और तुम? तुम हो एक अंत...

धरती और मेरा आसमान

मैं? मैं हूँ एक प्यारी सी धरती
कभी परिपूर्णता से तृप्त और कभी प्यासी आकाँक्षाओं में तपती.

और तुम? तुम हो एक अंतहीन आसमान
संभावनों से भरपूर और ऊंची तुम्हारी उड़ान
कभी बरसाते हो अंतहीन स्नेह और कभी.....
सिर्फ धूप......ना छांह और ना मेंह.

जब जब बरसता है मुझ पर
तुम्हारा प्रेम और तुम्हारी कामनाओं का मेंह
खिल उठता है मेरा मन और
अंकुरित होती है मेरी देह.

युगों युगों से मुझ पर हो छाए
मुझे अपने गर्वित अंक में समाये
सदियों का अटूट हमारा नाता है ...लेकिन
फिर भी कभी सम्पूर्ण ना हो पाता है.

धरती और आसमान....मिलते हैं तो सिर्फ क्षितिज में
सदियों से यही होता आया है ...और होगा.
जितना करीब आऊं
तुम्हारा सुखद संपर्क उतना ही ओझल हो जाता है.

लेकिन इन सब से मुझे कैसा अनर्थ डर?
अंतहीन युगों के अन्तराल से परे ...जब चाहूँ...

सतरंगी इन्द्रधनुषी रंगों की सीढियां चढ़ती हूँ
रंगीले कोहरे में रोमांचक नृत्य करती हूँ
परमात्मा के रचित मंदिर में तुम पर अर्चित होती हूँ
तुम्हें छू कर, तुम्हें पा कर, तुम पर समर्पित हो कर
फिर खुद ही खुद तक लौट आती हूँ.

अब ना मिलने की ख़ुशी है और ना ही ना मिलने का गम
मैं अब ना मैं हूँ और ना तुम हो तुम.... हैं तो बस अब सिर्फ हैं हम.

सिर्फ कहने भर को हूँ तुमसे मैं दूर.....

तुम्हारे आकर्षण की गुरुता में गुँथी
परस्पर आत्माओं के तृषित बंधन में बँधी
तुम्हारी किरणों के सिंधूरी रंगों से सजी
तुम्हारे मोहक संपर्क में मेरी नस नस रची.

मैं रहूँगी तुम्हारी प्रिया धरती
और रहोगे तुम मेरे प्रिय आसमान
मैं? मैं हूँ आसमान की धरती, और तुम?
तुम हो धरती के आसमान.

 pyash 
इस कदर छाई है दिल और दिमाग पर तेरी याद की आंधी
इस तूफ़ान में उड़ कर भी तेरे पास क्यों नहीं आ पाती?
इस कदर छाई है तन बदन पर तुझसे मिलने की प्यास
इस प्यास में तड़प कर भी तुझमें खो क्यों नहीं पाती?

बस आ...कि अब तुझ बिन कोई भी मुझे संभाल नहीं सकता
गंगा की वेगवती लहरें शिव की बलिष्ठ जटाएं चाहती हैं
बस आ..कि अब तो आंखें बहुत प्यासी हैं...और....
तेरे दर्शनों के सिवा अब कुछ भी इस प्यास को बुझा नहीं सकता.

तेरी बाँहों के झूले में झूल जाऊं
तेरी आँखों की नमीं में घुल जाऊं
तेरे हाथों की छूअन से पिघल जाऊं
तेरे गर्म सांसो की आँच में जल जाऊं...

तब हाँ...तब....

तब मेरे बदन की सब गिरहें खुल जायेंगी
और मैं तेरी बाँहों में और भी हल्की हो जाऊँगी
एक नशा सा हावी होगा मेरी रग रग में
और मैं एक तितली की तरह
रंगों में सराबोर हो कर आकाश में उड़ जाऊँगी.

चाहे जब मुझे आकाश में उड़ाना, पर मुझे अपनी चाहत में बांधे रखना
ताकी तेरे बंधनों में बंध कर जी सकूँ, उड़ने का सुख पहचान सकूँ
मुझे प्यासी ही रखना, ताकी तेरे लिए हमेशां प्यासी रह सकूँ
मरते दम तक इस प्यास को जी सकूँ, और इसी प्यास में मर सकूँ

अजीब ही बनाया है मालिक ने मुझे
पास लाकर भी दूर ही रखा है तुझसे...
वो ही जानता है इसका राज़.

शायद इस लिए की मिलने की खुशबू तो पल दो पल की , और फिर ख़त्म....
पर जुदाई की तड़प रहती है बरकरार, पल पल और हर दम...
इसी तड़प और इसी प्यार में जी रही हूँ मैं...
हर पल, हर दिन....
तुझसे मिलने की आस में, इंतज़ार में, गुम हूँ मेरे हमदम. 

kohra
हर तरफ छाया है कोहरा...आँखें हैं कुछ मजबूर
धुंधली सी बादल की एक चादर है
कुछ नहीं आता नज़र दूर दूर...
बस कुछ थोड़ी सी रोशनी और उसके पर सब कुछ खोया खोया सा...
मगर इस कोहरे के पार भी है कुछ...दिख रहा जाना पहचाना सा.
हाँ...तेरा चेहरा है...
प्यार बरसाता, मुस्कुराता सा, आँखों में लिए हजारों प्यार के झरने
दिल में अरमानों की झंकार सुनाता सा, होठों पर हैं मीठी मुस्कानों के नक्श गहरे.

तेरे सहारे और प्यार की ताकत है..
जो इस कोहरे के पार भी तेरा प्यारा चेहरा साफ़ दिखाए देता है
चल...जिन्दगी के इस त्यौहार को जी भर के जी लें
मनाएं खुशियाँ .....क्योंकि अभी तुझे और मुझे भी सांस आता है.

तुझ संग बीते लमहों की परछायीआं
मेरे उदास क्षणों को रोशनी देतीं हैं
जब मैं होती हूँ और मेरी तनहाईयाँ
तब ये बीते लम्हें जुगनू बन कर टिमटिमाते हैं

इन प्यार के ख्यालों के सामने कुछ भी सूनापन रह नहीं सकता
तेरा प्यारा चेहरा किसी कोहरे के पीछे छुप नहीं सकता.
icchao ka ghar
इच्छाओं का घर--- कहाँ है?
क्या है मेरा मन या मस्तिष्क या फिर मेरी सुप्त चेतना?

इच्छाएं हैं भरपूर, जोरदार और कुछ मजबूर.
पर किसने दी हैं ये इच्छाएं?
क्या पिछले जनमों से चल कर आयीं
या शायद फिर प्रभु ने ही हैं मन में समाईं?

पर क्यों हैं और क्या हैं ये इच्छाएं?

क्या इच्छाएं मार डालूँ?
या फिर उन पर काबू पा लूं?
और यदि हाँ तो भी क्यों?

जब प्रभु की कृपा से हैं मन में समाईं?
तो फिर क्या है उनमें बुराई?
kahani
वो आया
मेरा मन कुछ भरमाया
इससे पहले कि मै कुछ सोचती
अपने मन को टटोलती या कुछ सपने बुनती
अचानक पाया कि
वो तो था सिर्फ एक साया.

सालों बीते
जिन्दगी ने एक दिन फिर सामने ला खड़ा किया
मैने हैरानी से पलकें झपकाईं तो
उसे उसके जीवन साथी के संग पाया,
और वो?
कुछ नया नया सा...
हालांकि पुरुष था,
फिर भी कुछ शर्माता सा पेश आया.

मैं अचानक नींद से जागी
सब उमीदें जैसे पर लगा कर भागीं
और मैं जिन्दी के पथरीले धरातल पर आ खड़ी हुई.
तो अब? अब आगे बदना होगा
खुद ही खुद को संभाल कर
नई राहें तलाश करने को चलना होगा.

मैं चलती रही
कुछ राहें बनती रहीं, कुछ मैं बनाती रही
वो भी चलता रहा
पुरुष था ना,
उसके लिये राहें आसानी से खुलती रहीं
सालों पर सालों की परतें जमती रहीं.

एक दिन फिर मिले
वो ही पुरानी बातें.....पुराने शिकवे गिले
मेरे सपनों की रानी थीं तुम
क्यों तब कुछ नहीं बोलीं थीं तुम?
आज भी तुम्हें पूजता हूँ.
काश...तुम्हारा हाथ थाम कर चला होता
तो सफ़र कुछ अलग अंदाज में ढला होता.

मैं फिर हैरान परेशान......
वापिस मन की गहराईयों में उतरी
अपने वर्त्तमान की ऊचाईयों नीचाईयों में भटकी
शायद अभी भी कुछ था
जो कसमसाता था, सवाल करता था
कि ये ना होता तो क्या होता?
वैसा होता तो क्या अच्छा होता?
सवाल तो बहुत थे पर जवाब कुछ ना आया.

फिर एक दिन जाना
कि वो मौत से वाबस्ता था
मेरा मन ना रोता था ना हँसता था
फिर भी ना जाने क्यों यूँ ही पल पल तड़पता था.

आखिर आ खड़ी हुई परम पिता ईश्वर के द्वारे
माँगी दुआएं,
और बांधी हर ठिकाने मन्नती धागों की कतारें.
जाने मेरे धागे पक्के थे
या फिर मेरी दुआएं सच्चीं
या फिर था बस एक बहाना....
वो मौत के दरवाज़े से
खुदा के रहमों करम में लिपटा लौट आया.

जिन्दगी की रफ़्तार बहुत भारी है
वो ही दस्तूर अब फिर से ज़ारी है
अब ना कोई खबर आती है ना जाती है
मगर इतना जानती हूँ कि
आजकल वो फिर से हँसता बसता है
पर हाँ....अब फिर से उसका और मेरा अलग अलग रास्ता है.

क्या करें?
खुदा के बन्दे हर नए मोड़ पर एक नया रास्ता तलाशते हैं..
और फिर..
जिन्दगी के सफ़र तो बस अपने अपने ठिकानों पर ही जँचते हैं.

kahani
वो आया
मेरा मन कुछ भरमाया
इससे पहले कि मै कुछ सोचती
अपने मन को टटोलती या कुछ सपने बुनती
अचानक पाया कि
वो तो था सिर्फ एक साया.

सालों बीते
जिन्दगी ने एक दिन फिर सामने ला खड़ा किया
मैने हैरानी से पलकें झपकाईं तो
उसे उसके जीवन साथी के संग पाया,
और वो?
कुछ नया नया सा...
हालांकि पुरुष था,
फिर भी कुछ शर्माता सा पेश आया.

मैं अचानक नींद से जागी
सब उमीदें जैसे पर लगा कर भागीं
और मैं जिन्दी के पथरीले धरातल पर आ खड़ी हुई.
तो अब? अब आगे बदना होगा
खुद ही खुद को संभाल कर
नई राहें तलाश करने को चलना होगा.

मैं चलती रही
कुछ राहें बनती रहीं, कुछ मैं बनाती रही
वो भी चलता रहा
पुरुष था ना,
उसके लिये राहें आसानी से खुलती रहीं
सालों पर सालों की परतें जमती रहीं.

एक दिन फिर मिले
वो ही पुरानी बातें.....पुराने शिकवे गिले
मेरे सपनों की रानी थीं तुम
क्यों तब कुछ नहीं बोलीं थीं तुम?
आज भी तुम्हें पूजता हूँ.
काश...तुम्हारा हाथ थाम कर चला होता
तो सफ़र कुछ अलग अंदाज में ढला होता.

मैं फिर हैरान परेशान......
वापिस मन की गहराईयों में उतरी
अपने वर्त्तमान की ऊचाईयों नीचाईयों में भटकी
शायद अभी भी कुछ था
जो कसमसाता था, सवाल करता था
कि ये ना होता तो क्या होता?
वैसा होता तो क्या अच्छा होता?
सवाल तो बहुत थे पर जवाब कुछ ना आया.

फिर एक दिन जाना
कि वो मौत से वाबस्ता था
मेरा मन ना रोता था ना हँसता था
फिर भी ना जाने क्यों यूँ ही पल पल तड़पता था.

आखिर आ खड़ी हुई परम पिता ईश्वर के द्वारे
माँगी दुआएं,
और बांधी हर ठिकाने मन्नती धागों की कतारें.
जाने मेरे धागे पक्के थे
या फिर मेरी दुआएं सच्चीं
या फिर था बस एक बहाना....
वो मौत के दरवाज़े से
खुदा के रहमों करम में लिपटा लौट आया.

जिन्दगी की रफ़्तार बहुत भारी है
वो ही दस्तूर अब फिर से ज़ारी है
अब ना कोई खबर आती है ना जाती है
मगर इतना जानती हूँ कि
आजकल वो फिर से हँसता बसता है
पर हाँ....अब फिर से उसका और मेरा अलग अलग रास्ता है.

क्या करें?
खुदा के बन्दे हर नए मोड़ पर एक नया रास्ता तलाशते हैं..
और फिर..
जिन्दगी के सफ़र तो बस अपने अपने ठिकानों पर ही जँचते हैं. 

COMMENTS

नाम

अंजना बख्शी,1,अंजना भट्ट,1,अकबर इलाहाबादी,2,अटलबिहारी बाजपेयी,1,अमिताभ बच्चन,1,अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध,1,अर्जुन की प्रतिज्ञा ( काव्य ),1,आधुनिक कवि,11,आलेख,1,कथाएँ,1,कविताएँ,25,कुण्डलियाँ,6,कुण्डलियाँ-सवैया,6,कुमार विश्वास,6,ग़जलें,7,गिरधर कविराय,6,गुलज़ार,2,गोपाल दास नीरज,11,गोस्वामी तुलसीदास,2,जाँतगीत,1,डॉ अर्चना गुप्ता,1,डॉ पवन मिश्र,1,देवीगीत,3,दोहा-चौपाईयाँ,1,द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी,1,नवोदित कवि,3,निर्गुण,1,प्रेरणात्मक काव्य,10,फाग,1,बाल कविता,5,बाल साहित्य,8,बालगीत,1,भवानी प्रसाद,1,महादेवी वर्मा,2,माखनलाल चतुर्वेदी,1,मुक्तक-छन्द,1,मुनव्वर राणा,6,मैथिलीशरण गुप्त,2,रवीन्द्रनाथ टैगोर,1,रामधारी सिंह दिनकर,1,राष्ट्रीय गीत,2,रोटीगीत,1,लोकगीत,12,व्यंग्य,1,शहरयार,7,शायरियाँ,2,शिवमंगल सिंह ‘सुमन,1,श्रीमती नैमिष शर्मा,1,संस्मरण,1,सहित्यशाला,4,सामयिक काव्य,1,साहित्य,3,साहित्याशाला,63,सोहनलाल द्विवेदी,1,सोहर,3,हरिवंश राय बच्चन,12,हिंदी कविताकोष,37,Akbar allahabadi,2,Amitabh bachchan,1,Anjana Bakshi,1,Anjana bhatt,1,Ayodhya singh upadhyaya hariaudh,1,Bal kavita,7,Bhawani prasad,1,Dwarika prasad maheshvari,1,Emerging Poet,3,Ghazalen,4,Gopal das neeraj,11,Harivansh rai bacchan,18,Hindi kavitakosh,55,Kumar Vishwas,9,Literature,1,Mahadevi verma,1,Maithili sharan gupt,1,Modern,1,Modern Poet,20,Mordern poet,9,Motivation,10,Munavvar Rana,5,Munvvar Rana,1,National poems,1,National songs,1,Poems,1,Regional poem,1,Sahitya,8,sahityashala,16,Samyik kavya,1,Shiv mangal singh suman,1,Story,1,Sudhanshu shrivastava,3,Tulsidas,1,
ltr
item
साहित्य शिखर : डिजिटल सहित्यशाला । भारतीय सहित्य । Indian Literature: धरती और मेरा आसमान - अंजना भट्ट
धरती और मेरा आसमान - अंजना भट्ट
https://2.bp.blogspot.com/-usnRvKCrwHo/WmnjGsZyrhI/AAAAAAAARSc/VB5hmhOD_qARGVx9mD9IhniUQBEAaqHXwCLcBGAs/s640/maxresdefault.jpg
https://2.bp.blogspot.com/-usnRvKCrwHo/WmnjGsZyrhI/AAAAAAAARSc/VB5hmhOD_qARGVx9mD9IhniUQBEAaqHXwCLcBGAs/s72-c/maxresdefault.jpg
साहित्य शिखर : डिजिटल सहित्यशाला । भारतीय सहित्य । Indian Literature
https://sahitya.primaryshiksha.com/2018/01/blog-post_25.html
https://sahitya.primaryshiksha.com/
https://sahitya.primaryshiksha.com/
https://sahitya.primaryshiksha.com/2018/01/blog-post_25.html
true
7154742602350988664
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy