सिंधु में ज्वार : Sindhu Me Jwar Motivational Poem : अटलबिहारी बाजपेयी

सिन्धु में ज्वार आज सिन्धु में ज्वार उठा है , नगपति फिर ललकार उठा है, कुरुक्षेत्र के कण-कण से फिर, पांञ्चजन्य हुँकार उठा है। शत – शत आघा...

सिन्धु में ज्वार

आज सिन्धु में ज्वार उठा है , नगपति फिर ललकार उठा है,
कुरुक्षेत्र के कण-कण से फिर, पांञ्चजन्य हुँकार उठा है।
शत – शत आघातों को सहकर जीवित हिन्दुस्थान हमारा,
जग के मस्तक पर रोली-सा, शोभित हिन्दुस्थान हमारा।

दुनिया का इतिहास पूछता, रोम कहाँ, यूनान कहाँ है?
घर-घर में शुभ अग्नि जलाता , वह उन्नत ईरान कहाँ है?
दीप बुझे पश्चिमी गगन के , व्याप्त हुआ बर्बर अँधियारा ,
किन्तु चीरकर तम की छाती , चमका हिन्दुस्थान हमारा।

हमने उर का स्नेह लुटाकर, पीड़ित ईरानी पाले हैं,
निज जीवन की ज्योत जला , मानवता के दीपक वाले हैं।

जग को अमृत घट देकर, हमने विष का पान किया था,
मानवता के लिए हर्ष से, अस्थि-वज्र का दान दिया था।

जब पश्चिम ने वन-फल खाकर, छाल पहनकर लाज बचाई ,
तब भारत से साम-गान का स्वर्गिक स्वर था दिया सुनाई।

अज्ञानी मानव को हमने, दिव्य ज्ञान का दान दिया था,
अम्बर के ललाट को चूमा, अतल सिन्धु को छान लिया था।

साक्षी है इतिहास प्रकृति का,तब से अनुपम अभिनय होता है,
पूरब में उगता है सूरज, पश्चिम के तम में लय होता हैं।

विश्व गगन पर अगणित गौरव के, दीपक अब भी जलते हैं,
कोटि-कोटि नयनों में स्वर्णिम, युग के शत सपने पलते हैं।

किन्तु आज पुत्रों के शोणित से, रंजित वसुधा की छाती,
टुकड़े-टुकड़े हुई विभाजित, बलिदानी पुरखों की थाती।

कण-कण पर शोणित बिखरा है, पग-पग पर माथे की रोली,
इधर मनी सुख की दीवाली, और उधर जन-जन की होली।

मांगों का सिंदूर, चिता की भस्म बना, हां-हां खाता है,
अगणित जीवन-दीप बुझाता, पापों का झोंका आता है।

तट से अपना सर टकराकर, झेलम की लहरें पुकारती,
यूनानी का रक्त दिखाकर, चन्द्रगुप्त को है गुहारती।

रो-रोकर पंजाब पूछता, किसने है दोआब बनाया,
किसने मंदिर-गुरुद्वारों को, अधर्म का अंगार दिखाया?
खड़े देहली पर हो, किसने पौरुष को ललकारा,
किसने पापी हाथ बढ़ाकर माँ का मुकुट उतारा।

काश्मीर के नंदन वन को, किसने है सुलगाया,
किसने छाती पर, अन्यायों का अम्बार लगाया?
आंख खोलकर देखो! घर में भीषण आग लगी है,
धर्म, सभ्यता, संस्कृति खाने, दानव क्षुधा जगी है।

हिन्दू कहने में शर्माते, दूध लजाते, लाज न आती,
घोर पतन है, अपनी माँ को, माँ कहने में फटती छाती।
जिसने रक्त पीला कर पाला , क्षण-भर उसकी ओर निहारो,
सुनी सुनी मांग निहारो, बिखरे-बिखरे केश निहारो।
जब तक दु:शासन है, वेणी कैसे बंध पायेगी,
कोटि-कोटि संतति है, माँ की लाज न लुट पायेगी।

– अटल बिहारी बाजपेयी – Atal Bihari Vajpayee

COMMENTS

नाम

अंजना बख्शी,1,अंजना भट्ट,1,अकबर इलाहाबादी,2,अटलबिहारी बाजपेयी,1,अमिताभ बच्चन,1,अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध,1,अर्जुन की प्रतिज्ञा ( काव्य ),1,आधुनिक कवि,11,आलेख,1,कथाएँ,1,कविताएँ,25,कुण्डलियाँ,6,कुण्डलियाँ-सवैया,6,कुमार विश्वास,6,ग़जलें,7,गिरधर कविराय,6,गुलज़ार,2,गोपाल दास नीरज,11,गोस्वामी तुलसीदास,2,जाँतगीत,1,डॉ अर्चना गुप्ता,1,डॉ पवन मिश्र,1,देवीगीत,3,दोहा-चौपाईयाँ,1,द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी,1,नवोदित कवि,3,निर्गुण,1,प्रेरणात्मक काव्य,10,फाग,1,बाल कविता,5,बाल साहित्य,8,बालगीत,1,भवानी प्रसाद,1,महादेवी वर्मा,2,माखनलाल चतुर्वेदी,1,मुक्तक-छन्द,1,मुनव्वर राणा,6,मैथिलीशरण गुप्त,2,रवीन्द्रनाथ टैगोर,1,रामधारी सिंह दिनकर,1,राष्ट्रीय गीत,2,रोटीगीत,1,लोकगीत,12,व्यंग्य,1,शहरयार,7,शायरियाँ,2,शिवमंगल सिंह ‘सुमन,1,श्रीमती नैमिष शर्मा,1,संस्मरण,1,सहित्यशाला,4,सामयिक काव्य,1,साहित्य,3,साहित्याशाला,63,सोहनलाल द्विवेदी,1,सोहर,3,हरिवंश राय बच्चन,12,हिंदी कविताकोष,37,Akbar allahabadi,2,Amitabh bachchan,1,Anjana Bakshi,1,Anjana bhatt,1,Ayodhya singh upadhyaya hariaudh,1,Bal kavita,7,Bhawani prasad,1,Dwarika prasad maheshvari,1,Emerging Poet,3,Ghazalen,4,Gopal das neeraj,11,Harivansh rai bacchan,18,Hindi kavitakosh,55,Kumar Vishwas,9,Literature,1,Mahadevi verma,1,Maithili sharan gupt,1,Modern,1,Modern Poet,20,Mordern poet,9,Motivation,10,Munavvar Rana,5,Munvvar Rana,1,National poems,1,National songs,1,Poems,1,Regional poem,1,Sahitya,8,sahityashala,16,Samyik kavya,1,Shiv mangal singh suman,1,Story,1,Sudhanshu shrivastava,3,Tulsidas,1,
ltr
item
साहित्य शिखर : डिजिटल सहित्यशाला । भारतीय सहित्य । Indian Literature: सिंधु में ज्वार : Sindhu Me Jwar Motivational Poem : अटलबिहारी बाजपेयी
सिंधु में ज्वार : Sindhu Me Jwar Motivational Poem : अटलबिहारी बाजपेयी
https://lh3.googleusercontent.com/-H9w-xjl_gJg/Wm1JuOtRW2I/AAAAAAABhOw/Y1AVDZGNIqAyqgiQZ0QSbbl_v3SCNV3ngCHMYCw/s640/151711165628829328410.png
https://lh3.googleusercontent.com/-H9w-xjl_gJg/Wm1JuOtRW2I/AAAAAAABhOw/Y1AVDZGNIqAyqgiQZ0QSbbl_v3SCNV3ngCHMYCw/s72-c/151711165628829328410.png
साहित्य शिखर : डिजिटल सहित्यशाला । भारतीय सहित्य । Indian Literature
https://sahitya.primaryshiksha.com/2018/01/sindhu-me-jwar-motivational-poem.html
https://sahitya.primaryshiksha.com/
https://sahitya.primaryshiksha.com/
https://sahitya.primaryshiksha.com/2018/01/sindhu-me-jwar-motivational-poem.html
true
7154742602350988664
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS CONTENT IS PREMIUM Please share to unlock Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy